Speech on Agriculture in hindi - कृषि पर भाषण


मेरे आदरणीय सभापति महोदय, अतिथि विशेष________ महोदय, माननीय शिक्षागन और मेरे प्यारे सहपाठियों आज मै आपके सामने इस पावन अबसर पर अपने कुछ बिचार प्रगट करना चहता हूँ। 

भारत सदैब से कृषि प्रधान देश रहा है। देश की लगभग 75% जनसंख्या की जीविका का आधार आज भी कृषि है। पहले समय में तो ना केवल गांव के लोग कृषि कार्य करते थे परंतु 40-50% नगरों के लोग भी कृषि करते थे। आज भी नगरों के बाहरी भागों में सब्जी और फूलों की खेती होती है। 

नगरों में उद्योग, कारखाने और बाजार होने के कारण वहां के अधिकांश लोग व्यापार और नौकरी करते हैं। गांव आज भी कृषि का केंद्र है। पुराने समय से ही कृषि का माध्यम पशु रहे हैं और पशुओं की देखभाल, पोषण-रक्षण और चारे की व्यवस्था गांव में ही अधिकतर होती है।

भारतीय कृषि का जीवन सादा सरल प्राकृतिक के समीप और परिश्रम प्रधान है। आज तो वैज्ञानिक साधनों और खादो ने कृषि को व्यवसाय बना दिया है। बड़े-बड़े किसान तो अब कृषि व्यापारी बनकर वैज्ञानिक उपकरणों से कृषि कार्य करते और आर्थिक लाभ प्राप्त करते हैं।

हल बैल भारतीय किसानों के रात-दिन का साथी हैं। इन्हीं के चारों और उसका जीवन बितता है। खुला आकाश उसकी छय है। धरती और खेत उसका घर है। धूप और चांदनी उसकी रजाई है। नंगे बदन, एक लंगोटी कमर में, सर पर पगड़ी बांधे, कभी रूखी रोटी और कभी दाल से रोटी खाकर अपना जीवन बतित कर रहे हैं।

भारतीय किसान कम में संतुष्ट रहने वाला, दिन-रात परिश्रम करके मिट्टी में पसीना बहाता हुआ, मूसलाधार वर्षा में भीगता हुआ और ठंडी रातों में कांपकर धरती मां की सेवा करता है। वह अपने देश को ही अन्न नहीं खिलाता परंतु अपने देशवासियों का पेट भरकर आज विदेशों में अन्न भेजने में समर्थ हो चुका है। 

एक बार नारद ने विष्णु भगवान से पूछा था कि आपका सबसे बड़ा और प्रिय भक्त कौन है? भगवान विष्णु ने नारद के साथ भेष बदलकर एक गांव के सीधे-साधे किसानों के दर्शन कराते हुए कहा था कि यही मेरे सबसे बड़े भक्त हैं जो खुद भूखे प्यासे रहकर भी अपने पशुओं के साथ रहते है, दिन रात खेतों पसीना बहाते और जो रुखा सुखा मिलता है उसे भगवान का प्रसाद मानकर खा लेते हैं।

यह इतने सीधे और सरल स्वभाव के हैं कि कोई इन से धोखा भी दे दे तब भी यह बुरा नहीं मानते। भगवान के भरोसे अपनी खेती करते हैं। 

धन्यवाद

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