Essay on 15 August in Hindi - 15 अगस्त पर निबंध हिंदी मे

essay on 15 august in hindi

पहले हम सभी भारतवासी अंग्रेजों के गुलाम थे। हमारा अपना कोई महत्व नहीं था। दुनिया हमें घृणा से देखती थी। विदेशों में सब जगह हमारा अपमान होता था। महात्मा गांधी जैसे व्यक्ति के पास रेल का प्रथम श्रेणी का टिकट होते हुए भी साउथअफ्रीका में उन्हें रेल के डिब्बे से नीचे फैंक दिया गया।

15 अगस्त 1947 के दिन भारत अंग्रेजों के शासन से मुक्त हुआ। अंग्रेजों की गुलामी का भार भारतीयों के कंधे से 200 साल की गुलामी के बाद उतर गया। इस दिन हिंदू और मुसलमान के नाम पर भारत के दो टुकड़े हो गए। पाकिस्तान नाम का राष्ट्र अलग स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। 

15 अगस्त 1947 की आधी रात 12 बजे दिल्ली के लाल किले से गुलामी का प्रतीक अंग्रेजी राष्ट्र का झंडा यूनियन जैक उतार दिया गया और हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लहरा दिया गया। 1857 के प्रथम स्वतंत्र संग्राम का सपना आज के दिन पूरा हो गया। इस दिन भारत स्वाधीन हो गया। भारत की गुलामी की जंजीरे टूट गई।

15 अगस्त यानी स्वाधीनता दिवस को हासिल करने में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दे दिया। देश के हजारों स्वतंत्रता सेनानी आजादी के लिए जेल में सड़ते रहे। अंग्रेजों ने मां धरती के सैकड़ों सपूतों को फांसी के तख्ते पर चढ़ा दिया। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक तथा वीर सावरकर को अंडमान की जेल में भेज दिया और महात्मा गांधी, जवाहरलालनेहरू, सरदार पटेल, वीर सुभाष चंद्र बोस जैसे वीरों के साथ देश के अनेक जेलो में भयंकर यातनाएं सहनी पड़ी। 

क्रांतिकारी वीरों में चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, खुदीरामबोस, अशफाकउल्ला जैसे वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। माताओं की गोदें सुनी हो गई। बहनों के भाई चलें गए, सुहागिनों की मांगों का सिंदूर उजड़ गया। जलियांवाला बाग जैसा हत्याकांड हुआ तब कहीं जाकर आजादी मिली।

आज हम स्वाधीन हैं। अपने देश के लिए हमें परिश्रम करना है, योग्य बनना है। अपने कर्तव्य, देश प्रेम, और दायित्व की पूर्ति करके ज्ञान, विज्ञान, व्यापार में आगे बढ़ते जाना है। आर्थिक क्षेत्र में, सैनिक शक्ति में तथा कृषि में दुनिया के देशों से आगे बढ़ना है। तिरंगे को विश्व विजयी बनाना है। दुनिया में शक्तिशाली बनना है।

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