किसी के भी मन को मोह लेने की मोहिनी शक्ति का नाम 'भाषण' है। भाषण देना एक कला है। आज का युग सामाजिक, राजनैतिक चेतना का युग है। विद्यालयी परिवेश से लेकर सामाजिक तथा राजनीतिक प्रत्येक क्षेत्र में भाषण दूवारा अपन दृष्टिकोण प्रस्तुत करना इस युग की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
यह मौखिक रचना का उत्कृष्ट रूप है। आजकल विद्यालयों और अन्य संस्थानों में भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है, जिनमें विभिन्न विषयों पर भाषण के रूप में वक्ता को अपने विचार व्यक्त करने होते हैं। भाषण किसी भी विषय से संबंधित हो सकते हैं। जैसे-पर्यावरण संबंधी, देशभक्ति संबंधी, नेतिक मूल्यों से संबंधित आदि।
अच्छे भाषण में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए।
1. प्रभावपूर्ण भाषण के लिए सर्वप्रथम विषय का चुनाव सोच-समझ कर करना चाहिए।
2.भाषण की भाषा सरल, रोचक तथा सारगर्भित होनी चाहिए।
3. भाषण जोश, उमंग तथा उत्साह से पूर्ण चाहिए।
4. वक्ता को मुहावरों, लोकोक्तियों ओर समाचारों का ज्ञान होना चाहिए।
5. भाषण के विषय को जन-जीवन से जोड़ना चाहिए।
6. नवीनतम घटनाओं तथा समाचारों से भाषण को जोड़ना चाहिए।
7. भाषण का प्रारंभ नवीन प्रकार से करना चाहिए ताकि श्रोता का ध्यान आकर्षित किया जा सकें।
8. भाषणकर्तता के स्वर में आरोह-अवरोह होना चाहिए। आवश्यक स्थान पर उसमें जोश हो, निराशापूर्ण बातों पर ठंडी सांस ली जाए।
9. भाषण के मध्य कोई कविता, शेर, संस्मरण , घटना चुटकला आदि सुनाना चाहिए।
10. कविता/शेर/सूक्ति अवसर की आवश्यकतानुसार ही सुनानी चाहिए।
11. भाषण में सजीवता होनी चाहिए।
12. भाषण के शीर्षक पर वक्ता को पहले ही चिंतन कर लेना चाहिए।
13. विषय का प्रस्तुतिकरण क्रमबद्ध, सरल और स्पष्ट होना चाहिए।
14. भाषण के सभी तथ्य विषय से संबंधित होने चाहिए।
15. भाषण में किसी अनाआवश्यक बात का उल्लेख नहीं होना चाहिए।
16. किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचाने वाला भाषण वक्ताओं को प्रभावित करता हैं। अत: भाषण में पूर्णता होनी चाहिए।
17. भाषण में मस्तिष्क तथा हृदय दोनों का समावेश होना चाहिए। प्रत्येक भावना की अभिव्यक्ति सोच-समझकर करनी चाहिए।
18. भाषण देते समय मंच के साथ दर्शकों को भी संबोधन की आवश्यकता होती है।
19. मुख्य अतिथि के लिए परम श्रद्धेय/परम आदरणीय/सम्माननीय/समादरणीया/ आदर के योग्य/मान के योग्य पूज्य/ माननीय आदि विशेषणों का प्रयोग करना चाहिए। संबोधन से श्रोताओं में रुचि पैदा होती है।
20. भाषण के मध्य श्रोताओं को उनकी उपस्थिति का अहसास कराते रहना चाहिए। उसके लिए भाषण के मध्य श्रोताओं को संबोधित करते रहना चाहिए।
21. भाषण के अंत में आप श्रोताओं का धन्यवाद अवश्य करें।
भाषणकर्ता को विषय से संबंधित तैयारी पहले से करके जाना चाहिए। पूर्व तैयारी से मन शांत रहता है, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। भाषण देते समय सोचने के लिए बीच में अधिक देर तक रुकना नहीं पड़ता। भाषण का क्रम और गति बनी रहती है, श्रोताओं का आकर्षण बना रहता है।
